माघी पूर्णिमा कब है 2026 में? माघ पूर्णिमा की तारीख और शुभ समय जानें

माघी पूर्णिमा कब है 2026 में? माघ पूर्णिमा की तारीख और शुभ समय जानें

माघी पूर्णिमा (Maghi Purnima 2026) हिंदू धर्म की उन प्रमुख तिथियों में से एक है, जिनका सीधा संबंध स्नान, दान, तप और मोक्ष से जोड़ा जाता है। हर वर्ष माघ मास की पूर्णिमा को श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं।
ऐसे में वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा को लेकर लोगों के मन में यह सवाल है कि माघी पूर्णिमा कब है, किस दिन स्नान-दान करना शुभ रहेगा और पंचांग के अनुसार इसका सही समय क्या है।

यहां आपको माघ पूर्णिमा 2026 से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां क्रमवार मिलेंगी।

माघी पूर्णिमा क्या होती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास वर्ष का 11वां महीना होता है। इस मास की पूर्णिमा तिथि को ही माघी पूर्णिमा कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इस दिन किया गया व्रत, तप और दान मनुष्य को आध्यात्मिक शुद्धि प्रदान करता है। यही कारण है कि माघ पूर्णिमा का पंचांग और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में माघ पूर्णिमा को विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे: माघी पूर्णिमा, ब्रह्म पूर्णिमा (Brahma Purnima), बत्तीसी पूर्णिमा, महाराष्ट्र में इसे माघी गणेश जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

माघी पूर्णिमा कब है 2026 में? (Maghi Purnima 2026 Date)

वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026, रविवार को पड़ेगी।
यह तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी गई है और इसी दिन स्नान, दान व तर्पण करना श्रेष्ठ बताया गया है।

माघ पूर्णिमा 2026 की तारीख और समय (Date and Time)

पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ:
    1 फरवरी 2026, रविवार – सुबह 05:52 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त:
    2 फरवरी 2026, सोमवार – सुबह 03:38 बजे

चूंकि पूर्णिमा तिथि का उदय 1 फरवरी को हो रहा है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और दान इसी दिन करना अधिक फलदायी माना जाता है।

माघ मास कब से कब तक रहेगा 2026 में?

माघ मास का आरंभ पौष पूर्णिमा के बाद होता है और इसका समापन माघ पूर्णिमा पर माना जाता है।
इसी कारण माघ पूर्णिमा को माघ मास का सबसे महत्वपूर्ण दिन कहा गया है।

माघी पूर्णिमा 2026

माघ स्नान पर्व का महत्व और समापन

  • माघ स्नान पर्व पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है।
  • इस दौरान श्रद्धालु प्रातःकाल नदियों में स्नान करते हैं और सात्त्विक जीवन अपनाते हैं।
  • दान, जप और तप इस पर्व का मुख्य हिस्सा हैं।
  • माघ पूर्णिमा को इस साधना और स्नान पर्व की पूर्णता माना जाता है।
  • खासकर गंगा स्नान का पुण्य और महत्व बहुत अधिक माना जाता है।

माघी पूर्णिमा 2026 का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान और दान:

  • पापों के शमन में सहायक माना जाता है
  • पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है
  • आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य की प्राप्ति कराता है

इसी कारण यह तिथि श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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